विकास सेक्टर
वर्कशॉप – “आप आईये तो सही!”
संस्थाओं की वर्कशॉप में “हम आएंगे” जितना आम है, उतना ही “नहीं आ पाएंगे” भी।सभी राज्यों में काम करने वाले शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम कैसे बनाएं?
सरकारी व्यवस्थाओं के साथ काम करने वाली गैर-लाभकारी संस्थाओं के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों के मानकीकरण और संदर्भीकरण के बीच संतुलन बनाना, हमेशा एक बड़ा सवाल बना रहता है।फील्ड विजिट तो होगी लेकिन हवा में नहीं, हिसाब में
विकास सेक्टर में काम करते हुए फील्ड विजिट्स कभी कम नहीं हो सकती हैं लेकिन उनका बजट होता रहता है, इसलिए इस बार संस्थाओं से मुलाकात से ज्यादा सफर के खर्चे की चिंता है।जलवायु संकट से सुरक्षित भविष्य बनाने में समुदाय क्या भूमिका निभा सकते हैं?
जलवायु प्रयासों में अक्सर स्थानीय समुदायों और साझा संसाधनों की भूमिका अनदेखी रह जाती है जबकि इन्हें शामिल करना सामाजिक और न्यायिक नजरिए से जरूरी लगने लगा है।सरल कोश: कोहोर्ट
इस सरल कोश में कोहोर्ट की शाब्दिक परिभाषा के साथ हम यह भी बताएंगे कि यह शब्द कहां से आया और विकास क्षेत्र में इसका प्रयोग किन संदर्भों में किया जाता है।जलवायु परिवर्तन फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं के जीवन को कैसे प्रभावित करता है?
विकास सेक्टर के जमीनी कार्यकर्ता जलवायु परिवर्तन के असर से अछूते नहीं हैं, यह जीवन के साथ-साथ उनके काम की निरंतरता और प्रभावशीलता को भी बुरी तरह प्रभावित करता है।साझा प्रयास: भारतीय नागरिक समाज के भविष्य की नींव
बढ़ते दबावों के बीच गैर-लाभकारी संस्थाओं की सबसे बड़ी ताकत उनकी विविधता है, जिसका प्रभावी उपयोग भारत के सामाजिक क्षेत्र के अस्तित्व और भविष्य की कुंजी साबित होगा।सूचना के अधिकार का बेहतर इस्तेमाल कैसे करें?
आरटीआई अधिनियम का इस्तेमाल अक्सर राज्य स्तर के पोर्टल की सुगमता पर निर्भर होता है। प्रस्तुत हैं आरटीआई दाखिल करने के कुछ प्रभावी सुझाव, जिनसे व्यापक बदलावों की राह प्रशस्त हो सकती है।दिवाली सेल में सामाजिक बदलाव पर स्पेशल डिस्काउंट!
अब सामाजिक बदलाव पर भी मिल रहा है स्पेशल डिस्काउंट! जल्दी करें, ऑफर सीमित समय के लिए लागू।फंडर को क्या चाहिए? बस हमारा सुकून!
जीवन और उसकी अनंत चुनौतियों से आगे बस एक चीज है! फंडर्स की मांगें…कुछ ऐसी ही बात कहता एक जमीनी किस्सा।गिग कामगारों को बुनियादी अधिकार देने वाले कानूनों की राह इतनी कठिन क्यों है
लंबे समय तक एडवोकेसी और संघर्ष के बाद बने कानूनों से कई राज्यों में गिग और प्लेटफार्म कामगारों को सामाजिक सुरक्षा का आश्वासन तो मिला है लेकिन इतना भर होना काफी नहीं है।