विकास सेक्टर
इम्पैक्ट स्केलिंग: काम का प्रभाव बढ़ाने की एक कुंजी
सरकार के साथ साझेदारी से लेकर मुक्त संसाधन बनाने तक, कई संस्थाओं ने प्रभाव बढ़ाने के नए रास्ते खोजे हैं। एक नई रिपोर्ट उनकी अहम सीख साझा करती है।नहीं सहेंगी, नहीं सहेंगी…सेक्टर की बिल्लियां नहीं सहेंगी
वर्ल्ड कैट डे पर पढ़िए थकान और बर्नआउट झेलती, चिढ़चिढ़ी और ट्रीट को तरसती सोशल सेक्टर बिल्लियों की पर्सनल म्याऊं डायरी।आईडीआर इंटरव्यूज | देविका सिंह
मोबाइल क्रेचेज की सह-संस्थापक देविका सिंह, प्रवासी मजदूरों के बच्चों के साथ अपने लंबे काम के अनुभव, एक चलती-फिरती देखभाल प्रणाली (मोबाइल केयर सिस्टम) बनाने और बच्चों की देखभाल से जुड़ी नीतियों में बदलाव लाने की कहानी साझा कर रही हैं।सरल कोश: स्पेशल एजुकेशन
अंग्रेजी-हिंदी शब्दकोश: विकास सेक्टर में इस्तेमाल होने वाले कठिन शब्दों की सरल व्याख्या - स्पेशल एजुकेशन।अब संस्थाओं का असर सिर्फ महसूस किया जाएगा, देखा नहीं जा सकेगा!
क्या हो अगर संस्थाएं अपना काम तो करें, पर बता न सकें? हो सकता है कि रिपोर्टिंग, मॉनिटरिंग और फंडिंग, सब कुछ भावनाओं से ही समझना पड़े। संस्थाओं के लिए फंडरेजिंग के कुछ कारगर उपाय
वित्तीय संकट के दौर में संस्थाओं के लिए फंडरेजिंग के विविध माध्यम तलाशना जरूरी है।जब तक सूरज-चांद रहेगा, किसका-किसका नाम रहेगा?
बड़ी घोषणाओं की जमीनी हकीकत में अक्सर विरोधाभास नजर आता है।विकास हो रहा है, अब बताओ – दिखेगा कब?
विकास से जुड़ी आधी-अधूरी और दिखावटी कोशिशों पर कुछ उलटबांसी।