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भारत के विकलांगता कानून की एक झलक
दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 विकलांग व्यक्तियों के लिए शिक्षा और रोजगार से लेकर स्वास्थ्य तक के अधिकार देता है। -
घुमंतू जनजातियां शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं से भी वंचित क्यों हैं?
सामाजिक कल्याण योजनाएं बनाते हुए अक्सर खानाबदोश और अधिसूचित जनजातियों के लिए सार्वजनिक सुविधाओं का ध्यान नहीं रखा जाता है जिसे बदले जाने की ज़रूरत है। -
भारत में हीट एक्शन प्लान कितने प्रभावी हैं?
जलवायु परिवर्तन से हीटवेव में हो रही बढ़ोत्तरी के लिए ज़रूरी है कि सरकार राष्ट्रीय स्तर की नीतियों में इससे निपटने के उपाय शामिल करे ताकि अर्थव्यवस्था और जनजीवन दोनों पर इससे पड़ने वाले असर को कम किया जा सके। -
देश का श्रमिक-वर्ग दस्तावेजों के मकड़जाल में उलझा क्यों दिखता है?
अपने देश के श्रमिक वर्ग के लिए सामाजिक कल्याण और योजनाओं के लाभ उपलब्ध करवाना तो दूर उन्हें उनके सरकारी पहचान दस्तावेज दिला पाने में भी हम बहुत पीछे हैं। -
क्या ‘एक देश एक चुनाव’ सचमुच अनेक समस्याओं का हल बन सकता है?
हिंदी पॉडकास्ट पुलियाबाज़ी में सुनें कि सरकार जिस ‘एक देश एक चुनाव’ नीति को लेकर इतनी गंभीरता दिखा रही है, उसका आम चुनावों और लोकतंत्र पर कैसा असर देखने को मिल सकता है। -
स्पीति अपनी परंपरागत वास्तुकला को क्यों छोड़ रहा है?
स्पीति ज़िले के परंपरागत लकड़ी शिल्पकार से जानिए कि कैसे बदलती खेती, बढ़ते पर्यटन और शहरीकरण ने इलाके में सामुदायिक जीवन और परंपरागत वास्तुकला को बदल दिया है। -
क्या सरकारी योजनाओं की परीक्षण-प्रक्रिया पर दोबारा विचार की ज़रूरत है?
भारत में पायलट प्रोजेक्ट के ज़रिए सरकारी योजनाओं के कार्यान्वयन प्रक्रिया की व्यवहारिकता का आकलन किया जाता रहा है। यहाँ पीएम कुसुम योजना पर किसानों द्वारा मिलने वाली संभावित प्रतिक्रियाओं का पता लगाने के लिए एक एबीएम अभ्यास का आयोजन किया गया है। -
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बाहरी सलाहकारों की मदद से अपने संगठन के प्रभाव को कैसे बढ़ाएं?
बाहरी सलाहकारों को लाना समाजसेवी संस्थाओं के प्रभाव को बढ़ाने में कैसे मददगार साबित हो सकता है, इस पर रोशनी डालती अंतरंग फ़ाउंडेशन से जुड़ी एक केस स्टडी। -
पंचायत के ऑनलाइन डाटाबेस को कैसे एक्सेस करें?
ऑनलाइन माध्यमों से आप घर बैठे न केवल ग्राम विकास से जुड़ी विभिन्न योजनाओं की जानकारी हासिल कर सकते हैं बल्कि दफ्तरों के अनावश्यक चक्कर लगाने से भी बच सकते हैं। -
क्या बेहतर उद्यमिता और रोज़गार सृजन भारत में गरीबी ख़त्म कर सकता है?
आर्थिक इतिहास के महान दिग्गजों ने रोज़गार सृजन और गरीबी में कमी के बीच के संबंध को पहचाना है, फिर भी अनिश्चितताएं बनी हुई हैं।