विषय
बजट 2025: सामाजिक क्षेत्र के लिए सरकार की 4 नई प्राथमिकताएं
केंद्र सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में सामाजिक क्षेत्र पर खर्च कम कर दिया है, जो देश की नीतिगत प्राथमिकताओं में बदलाव को दर्शाती है।शहर में बेघर, ऊपर से ठंड का कहर
अक्सर शहरों को सुंदर बनाए जाने के दौरान बेघर लोगों से उनके अस्थाई आश्रय भी छीन लिए जाते हैं जो ठंड और बारिश में उनका जीवन और कठिन बना देता है।प्रवासी श्रमिकों के सुरक्षित भविष्य की राह एक सुविचारित नीति से ही निकलेगी
कोविड महामारी के दौरान ही पता चल गया था कि प्रवासी श्रमिकों के मानवाधिकारों की सुरक्षा के लिए नीतियां, प्रक्रियाएं और प्रणालियां तत्काल तय किए जाने की ज़रूरत है।पीढ़ी दर पीढ़ी आने वाले सामाजिक बदलावों में बहुत समय और धैर्य लगता है
नट सरीखे पारंपरिक प्रथाओं को मानने वाले समुदाय के साथ काम करते हुए समय, धैर्य और सामाजिक जटिलताओं को गहरी समझ की ज़रूरत होती है।त्रिपुरा का मैतेई समुदाय अपने परंपरागत वाद्य को कैसे बचा सकता है?
त्रिपुरा में मैतेई त्योहारों का अभिन्न अंग रहा, पारंपरिक वाद्य पेना अब कई तरह की चुनौतियों के चलते विलुप्त होने की कगार पर खड़ा है।समाजसेवी संस्थाओं को सरकार के साथ जुड़कर काम क्यों करना चाहिए?
सरकार के साथ जुड़कर काम करने की चाह रखने वाली, समाजसेवी संस्थाओं के लिए पहले सरकार की विशेषता को भी अच्छे से समझना जरूरी है।साल 2024 में विकास के लिहाज से हमने क्या सीखा?
सुनिए चर्चा सामाजिक समस्याओं के समाधान में आने वाली बॉटलनेक, सिस्टम थिंकिंग और इससे जुड़े कई और विषयों पर।क्यों मेघालय में तिवा जनजाति को नाम से लेकर भाषा तक बदलनी पड़ रही है?
तिवा लोग असम के मैदानी और पहाड़ी इलाकों में रहते हैं जहां उन्हें अनुसूचित जनजाति माना गया है लेकिन मेघालय में ऐसा नहीं है।महिला सशक्तिकरण की सबसे बड़ी बाधा बनने वाला पितृसत्तात्मक समझौता क्या है?
कई बार महिलाएं उनके दमन के कारकों के खिलाफ खड़े होने की बजाय उन्हें मज़बूत करने लगती हैं जो उन्हें केवल अस्थाई लाभ दे सकते हैं।संपत्ति समावेशन क्या है और यह नागरिक अधिकारों से कैसे जुड़ता है?
भारत में संपत्ति क्षेत्र पर हालिया अध्ययन ने हाशिए पर रहने वाले और कमजोर समुदायों के लिए संपत्ति अधिकारों की चुनौतियों को उजागर किया है।