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फोटो निबंध: उत्तर त्रिपुरा के गौर समुदाय की पलायन यात्रा
कभी बांग्लादेश से त्रिपुरा की ओर पलायन करने वाला गौर समुदाय आज रबर की खेती के कारण खराब जमीन और पानी के संकट से जूझ रहा है।फोटो निबंध: नीति निर्माण और स्थानीय संदर्भ-एक परस्पर संवाद की आवश्यकता
टिकाऊ और असरदार विकास योजनाएं तब बेहतर काम करती हैं जब वे ज़मीनी हकीकत, सामुदायिक भागीदारी और वास्तविक ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए तैयार की जायें।हमारे कानूनों को हिंदी में पढ़ना और समझ पाना इतना कठिन क्यों है?
जनहित के लिहाज से सबसे जरूरी कानूनों को भी जिस तरह की हिंदी में लिखा जाता है, उसे समझने के लिए आम लोग तो छोड़िए हिंदी के जानकारों को भी कई बार शब्दकोश देखना पड़ सकता है।विकलांगता पर संवेदनशील पत्रकारिता: एक मार्गदर्शिका
विकलांगता के विषय पर होने वाली रिपोर्टिंग की भाषा में संवेदनशीलता की जरूरत है।समुदाय से संवेदना तक: मानसिक स्वास्थ्य में भागीदारी का सफर
जब कोई कार्यक्रम किसी लोगों के अनुभवों से मिलकर तैयार किया जाए तो वह अधिक मानवीय, नवीन और समानता आधारित होता है।बुंदेलखंड की चप्पल प्रथा: स्वाभिमान की कीमत पर सम्मान
बुंदेलखंड इलाके के ललितपुर जिले में आज भी चप्पल प्रथा कायम है जो दलित समुदाय खासकर, महिलाओं के लिए अपमान और असुविधा का कारण बन रहा है।आदिवासी समूहों की एकजुट पहल: जल और जमीन पर अधिकार की मांग
आदिवासी जनजातियां भू-अधिकारों और मत्स्य पालन को लेकर संगठित हो रही हैं, ताकि अपनी पारंपरिक आजीविका को सुरक्षित रख सकें।स्वास्थ्य और विकलांगता पर काम कर सशक्त होती पंचायतें
स्वास्थ्य क्षेत्र और विकलांगजन हित में काम करने से ग्राम पंचायतें प्रभावी और संवेदनशील बनती है, जिससे उनका सशक्तिकरण होता है।फोटो निबंध: ग्रामीण कचरा प्रबंधन के मिथक
कचरे की समस्या को एक शहरी चुनौती की तरह देखा जाता है लेकिन असल में यह आंकड़ों की अनुपलब्धता है जो गांवों की सही तस्वीर को सामने आने से रोकती है।रिवर फ्रंट: नदी, नियोजन और पर्यावरणीय सरोकार
किसी भी राज्य में रिवर फ्रंट से जुड़ी गतिविधियों की शुरुआत से पहले वहां की भौगोलिक परिस्थितियों और स्थानीय लोगों को भरोसे में लेना भी जरूरी है।अंबेडकर की विचार यात्रा कहां से कहां तक जाती है
पुणे स्थित स्वतंत्र शोधकर्ता और लेखक अशोक गोपाल के साथ, हिंदी पॉडकास्ट पुलियाबाज़ी की बातचीत।